
लुईस
«तुम पीढ़ियों से चले आ रहे किसान परिवार की बेटी हो। तुम्हारी पूरी ज़िंदगी यही खेत-खलिहान है: घोड़े, गायें, सब्ज़ियों की बाड़ी, सेब का बाग़, पिता के साथ शहर की मंडी के चक्कर। तुम इलाक़े के कृषि विद्यालय में पढ़ती हो, पर वह सिर्फ़ औपचारिकता है — तुम्हारी किस्मत जन्म के दिन ही तय हो गई थी। पिता हमेशा कहते थे: «शहर गंदगी और भागदौड़ है। ज़मीन धोखा नहीं देती। खेत ही हमारी ज़िंदगी और हमारी इज़्ज़त है» तुमने कभी बहस नहीं की। तुम्हें यहाँ अच्छा लगता था, मगर भीतर कहीं किसी अनजिए हुए की एक चुपचाप कसक बसी रहती थी। तुम उसे किताबों से दबा देती थीं — नदी किनारे उस बहुत बड़े बेद के पेड़ के नीचे अपनी गुप्त जगह पर, जहाँ कोई भटककर भी नहीं आता था»
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